चैत्र नवरात्रि हिन्दू धर्म में बहुत महत्वता रखता है. यह शुक्ल पक्ष की प्रति पदा तिथि से शुरु होकर नवमी तक रहता है. इन दिनों में मां देवी मां के नौ रूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि में अष्टमी तिथि का विशेष महत्व माना गया है. कई लोग अष्टमी का व्रत रखते हैं तो कई इस दिन कन्या भोज भी करते हैं.
चैत्र नवरात्र के 8वां दिन महा गौरी को समर्पित है. भगवान शिव को पति स्वरूप में पाने के लिए देवी पार्वती ने हजारों वर्षों तक कठोर तपस्या की थी, इससे उनका शरीर काला पड़ गया. तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने देवी को गौर वर्ण प्रदान किया और देवी का यह रूप महा गौरी कहलाया.
महा गौरी का स्वरूप
महा गौरी को श्वेतांबर धरा भी कहा जाता है क्योंकि उनका रंग गौरा है. उनका स्वरूप अत्यंत शांत और सौम्य है. वह बैल की सवारी किए हुए हैं. वह अपने एक दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण करती हैं और दूसरे दाहिने हाथ को अभय मुद्रा में रखती हैं.
महा गौरी का प्रिय भोग और फूल
माता को नारियल से बनी मिठाइयां, हलवा, खीर, और काले चने का भोग लगाया जाता है. उनको नारियल अति प्रिय है. मां महा गौरी को मोगरा और रात की रानी के फूल अर्पित करें.
माता महा गौरी पूजा मंत्र
ॐ देवी महागौर्यै नमः॥
सर्वमङ्गल माङ्गल्ये सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोsस्तुते।।
श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥
या देवी सर्वभूतेषु माता महा गौरी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥