हिंदू नववर्ष का शुभारम्भ हो चुका है. आज (30 मार्च) चैत्र महीने की शुक्लपक्ष की प्रतिपदा है और हर वर्ष इससे ही नववर्ष की शुरुआत होती है. इस दिन चैत्र नवरात्र पर्व भी आरम्भ होता है.
इस बार का ये हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत् 2082 के तौर पर जाना जाएगा. ज्योतिष विद्वानों के अनुसार इस विक्रम संवत् 2082 कालयुक्त संवत्सर का नाम सिद्धार्थ होगा और इसका वाहन घोड़ा रहेगा. इस संवत्सर में राजा और मंत्री के पद ग्रहों के राजा सूर्य के पास रहेगा. प्रतिपदा की तिथि के दिन जो वार होता है उसके आधार पर संवत्सर के राजा और मंत्री पद निर्धारित होता है. इस बार प्रतिपदा तिथि पर रविवार है, इसलिए राजा और मंत्री का पद सूर्य को मिला है. इस बार गर्मी ज्यादा होने के आसार हैं लेकिन नव संवत्सर उत्तम और अच्छा फल देने वाला साबित होगा. फसलें अच्छी रहेंगी.
हिंदू नववर्ष का मानव ही नहीं प्रकृति भी स्वागत कर रही होती है. इस दौरान ॠतुराज वसंत प्रकृति को अपने गोद में ले चुके होते हैं. हिंदू धर्म से जुड़े लोग हिंदू नववर्ष को बेहद उत्साह के साथ मनाते हैं. हिंदू नववर्ष का पहला पर्व चैत्र नवरात्र और गुड़ी पड़वा होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी और इस ही दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी हुआ था. आइए जानते हैं हिंदू नववर्ष से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों के बारे में विस्तार से.
क्या होता है विक्रम संवत्?
इतिहासकारों की मानें तो विक्रम संवत् की शुरुआत राजा विक्रमादित्य ने की थी. हिंदू पंचांग विक्रम संवत के आधार पर चलता है. हिंदू नव वर्ष इसी पर आधारित अंग्रेजी कैलेंडर से 57 साल आगे है.
विक्रम संवत् की विशेषताएं
चंद्र-सौर पंचांग
हिंदू पंचांग विक्रम संवत् की गणना चंद्रमा और सूर्य की गति के आधार पर होती है, जिससे इसकी सटीकता सुनिश्चित होती है.
हिंदू पंचांग में 12 मास होते हैं. इसमें चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन महीने शामिल हैं.
हिंदू पंचांग संवत्सर चक्र होता है. संवत्सर चक्र 60 वर्षों के चक्र में संचालित होता है और इसमें हर वर्ष का एक विशिष्ट नाम और प्रभाव होता है.
हिंदू पंचांग में त्योहारों की गणना विक्रम संवत् के अनुसार होती. सभी हिंदू त्योहार जैसे नवरात्र, रामनवमी, दीपावली, रक्षाबंधन, होली की तिथि का निधार्रण विक्रम संवत् के अनुसार की जाती है.
नवसंवत्सर पर बनेंगे शुभ संयोग
ज्योतिष गणना के अनुसार, इस संवत् में सूर्य, चंद्रमा, शनि, बुध, शुक्र और राहु ग्रहों की युति बनने जा रही है. इसके अतिरिक्त बुधादित्य और राजयोग का भी निर्माण हो रहा है, जिसका शुभ असर राशि के जातकों पर पड़ेगा.