पटना: बिहार में इन दिनों इफ्तार पार्टी की सियासत गरमाई हुई है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि हिंदू प्रतीकों का दिखावा कर वोट बैंक साधने तक जा पहुंचा है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की एक हरकत ने एक बार फिर उनकी धर्मनिरपेक्षता के नाम पर तुष्टिकरण की राजनीति को उजागर कर दिया है.
दरअसल, शुक्रवार को दरभंगा में एक इफ्तार कार्यक्रम में पहुंचे तेजस्वी यादव ने जालीदार टोपी पहन रखी थी, लेकिन इस कार्यक्रम से ठीक पहले वे एक मंदिर में पूजा-अर्चना भी कर रहे थे, जहां पुजारी ने उनके माथे पर तिलक लगाया था. लेकिन जब तेजस्वी इफ्तार में पहुंचे, तो वह तिलक गायब था.
“टीका से नफरत, टोपी से प्रेम”
राजस्व मंत्री संजय सरावगी ने कहा कि तेजस्वी का रूप देखकर अफसोस होता है. यह तुष्टिकरण की राजनीति का सबसे घटिया चेहरा है. टोपी पहनना गलत नहीं, लेकिन तिलक मिटाना सनातन धर्म का अपमान है. इतना ही मोह है तो धर्म बदल क्यों नहीं लेते?
उन्होंने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव के साथ जो लोग थे, उन्होंने भी टोपी और तिलक दोनों पहने थे. तो क्या तेजस्वी यादव का तिलक रह जाता तो धर्म खतरे में आ जाता?
“शर्म करें तेजस्वी, अपने धर्म का किया अपमान”
नगर विकास मंत्री जीवेश मिश्रा ने तेजस्वी यादव पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि तेजस्वी ने माता अहिल्या के मंदिर में आशीर्वाद लिया, लेकिन जैसे ही इफ्तार पार्टी में गए, तिलक मिटा दिया. यह सनातन संस्कृति के साथ विश्वासघात है. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सब स्वेच्छा से किया गया या किसी समुदाय के दबाव में?
तेजस्वी ने इस विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि हम मंदिर में पूजन कर आशीर्वाद लेते हैं और फिर रमज़ान के इस पाक महीने में रोज़ा इफ्तार में भी शरीक होते हैं. यही तो भारत की तहज़ीब है – गंगा-जमुनी संस्कृति.