हाल ही में संसद में संस्कृत को लेकर एक दिलचस्प विवाद सामने आया. डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने लोकसभा की कार्यवाही का संस्कृत में अनुवाद किए जाने पर आपत्ति जताई, इसे उन्होंने ‘पैसे की बर्बादी’ करार दिया. उन्होंने अन्य भाषाओं के साथ-साथ संस्कृत में भी बहस का अनुवाद करने पर आपत्ति जताई. इसके बाद लोकसभा स्पीकर ने उन्हें खरी-खरी सुना दी. उन्होंने सीधा सवाल किया कि आपको संस्कृत से इतनी दिक्कत क्यों है भाई?
डीएमके का हिंदी और संस्कृत विरोध नया नहीं है. तमिलनाडु की यह पार्टी लंबे समय से हिंदी थोपे जाने का विरोध करती रही है और संस्कृत को बढ़ावा देने को आरएसएस के एजेंडे से जोड़ती रही है. इसी कड़ी में लोकसभा में हुए हालिया विवाद को भी देखा जा सकता है.
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जब संसद की कार्यवाही को छह और भाषाओं- बोडो, डोगरी, मैथिली, मणिपुरी, संस्कृत और उर्दू में ट्रांसलेट करने की घोषणा की, तो डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने संस्कृत को लेकर आपत्ति जताई. उन्होंने इसे संसाधनों की बर्बादी बताते हुए विरोध किया.
इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कड़ा जवाब देते हुए पूछा, “आपको संस्कृत से इतनी दिक्कत क्यों है?” यह बयान सदन में चर्चा का विषय बन गया.
स्पीकर के बोलने पर डीएमके के नेता नारेबाजी करने लगे. इस पर स्पीकर ने पूछा कि आप लोगों की दिक्कत क्या है. इसके बाद डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने कहा कि संस्कृत में ट्रांसलेशन कराकर सरकार टैक्सपेयर के पैसे बर्बाद कर रही है. जो ठीक नहीं है.